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Friday, March 13, 2015

Alone.. POEM

साथ नहीं होता...

कुछ यूँ बढ़ चले हम उजाले की खोज में, आँखें खोलने का ख्याल भी ना आया..
उजाले में जब ढूंढा साथ हमने, पाया वहां बस अपना ही साया..

जाना के किसी तलाश में, कोई साथ नहीं होता,
ये दुनिया बड़ी ज़ालिम है, यहाँ कोई किसी के लिए नहीं रोता..
                                                                    
वे कहते थे, बढ़ो हम फलक तक साथ हैं,
ज़रा से मसलों में देख लिया, किसके कितने जज़्बात हैं..

तुम क्यों रोते हो उसके लिये जो इन आंसुओं के लायक नहीं,
जो होगा वो एक बाँध बनकर, इन्हे कभी बहने देगा नहीं..

दुनिया में जब दूजे पर, कभी जो करोगे तुम कोई आस,
अंत में खुद की नज़रों में, होगा तुम्हारा ही परिहास..

खुद को दरखत्त सा बना लो, के दुनिया तुम्हे हिला न पाये,
ज़रूरत हमें न होगी किसी की, ज़रूरतमंदों को हम मिल जाए..

यहाँ कोई किसी का नहीं होता, हमें दुनिया ने ये दिखलाया,
एक कदम बढाकर अपना हमने, इस दुनिया को झुठलाया..                                                                                                              
रचना-                                                                                               डॉ ऋचा अग्रवाल

Tuesday, July 8, 2014

SAANSAD.. VYANGYA KAVITA

ये सांसद ना जाने क्यूँ लड़ते झगड़ते हैं]
संसद  चलने से पहले ही स्थगित कर देते हैं। 

एक दूसरे की बुराई खोद खोद कर निकलते हैं] 
खुद कीचड़ मे बैठ औरों पर कीचड़ उछालते हैं। 

चूहे  बिल्ली का खेल जनता को दिखाते हैं] 
हो हल्ला मचाकर कुर्सी टेबल उछालते हैं। 

जनता की छोड़ बस अपनी सोचते हैं]
इस चक्कर में एक दूसरे के ही बाल नोचते हैं। 

ये सांसद ना जाने क्यूँ लड़ते झगड़ते हैं]
संसद चलने से पहले ही स्थगित कर देते हैं। 

भारत माँ की गोद में बैठ बंदर नाच दिखाते हैं]
सच और झूठ की लड़ाई छोड़s] जनता को आपस में लड़ाते हैं। 

सारी  बुराई तुम में हैंs] तुम क्या देश चलाओगेs]
तुम्हारी जेबें भर जाएंगीs] तब तो हमारी भर पाओगे 

ये जनता का पैसा हैs] इसे न यूँ गवाओं तुमs] 
संसद चलने से पहले स्थगित न करते जाओ तुम। 

अपनी बात रखकरs] औरों की भी सुनना हैs] 
सही राह चुनकरs] एक सफल भारत की सोच बुनना  है। 

लोगों की प्रेरणास्त्रोत बनकरs] अच्छा नाम कमाना हैs] 
वीआईपी  नहीं आम बनकरs] पूरे देश को सिखाना  है। 

माफ़ करना मुझे जितनी समझ थीs] मैंने सन्देश पहुँचाया हैs] 
भारत का एक नागरिक होने का मैंने फ़र्ज़ निभाया है।


- श्रीमती निर्मला अग्रवाल